‘महाराणा प्रताप के गाने पर गैंगस्टर सीन क्यों?’: ‘मिर्जापुर: द मूवी’ विवाद पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, मेकर्स से पूछा- जमीर संतुष्ट है?
Mirzapur: The Movie में महाराणा प्रताप को समर्पित ‘शूरवीर’ गाने के इस्तेमाल पर विवाद बढ़ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद मेकर्स ने गाना replace करने की जानकारी दी है।
नई दिल्ली: Mirzapur: The Movie को रिलीज हुए करीब दो हफ्ते हो चुके हैं और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन कर रही है, लेकिन अब इसके एक गाने को लेकर विवाद दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। फिल्म के क्लाइमैक्स में इस्तेमाल किए गए ‘शूरवीर’ गाने पर सवाल उठाए गए हैं। यह गाना मूल रूप से महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि के तौर पर बनाया गया था, जबकि फिल्म में इसे गैंगस्टर और हिंसा से जुड़े दृश्यों के दौरान इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताई गई है।
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म की तरफ से पेश वकील से बेहद सीधा सवाल किया। कोर्ट ने उन्हें फिल्म देखने के लिए कहा और पूछा कि क्या इस तरह के दृश्य के साथ महाराणा प्रताप से जुड़े गीत का इस्तेमाल किए जाने पर उनका “जमीर संतुष्ट” है।
दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद के बीच मेकर्स ने CBFC को बताया है कि वे संबंधित sequence से ‘शूरवीर’ को स्वेच्छा से replace करेंगे, हालांकि इसके लिए औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जानी बाकी है।
आखिर ‘शूरवीर’ गाने को लेकर विवाद क्या है?
‘शूरवीर’ गाना राजस्थानी कलाकार Rapperiya Baalam से जुड़ा है और इसे महाराणा प्रताप की वीरता, मेवाड़, चेतक, सम्मान और बलिदान को समर्पित किया गया था।
फिल्म में इस गाने का इस्तेमाल एक ऐसे sequence में किया गया है जिसमें अपराध और गैंगवार से जुड़े किरदार दिखाई देते हैं। इसी contrast ने विवाद को जन्म दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि महाराणा प्रताप जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व को समर्पित गीत को काल्पनिक गैंगस्टर किरदारों से जुड़े हिंसक sequence में इस्तेमाल करने से उस गीत और उससे जुड़ी ऐतिहासिक भावना का संदर्भ बदल जाता है।
कोर्ट में क्या हुआ?
दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने फिल्म की ओर से पेश वकील जय के. भारद्वाज से पूछा कि क्या उन्होंने फिल्म देखी है।
वकील ने स्वीकार किया कि उन्होंने फिल्म खुद नहीं देखी है। इसके बाद अदालत ने उन्हें फिल्म देखने और अगली सुनवाई में अपना जवाब देने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि अगर महाराणा प्रताप को प्रदर्शित करते हुए कोई गीत किसी ऐसे दृश्य की पृष्ठभूमि में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें हिंसा या गैंगस्टर गतिविधियां दिखाई जाती हैं, तो क्या यह इस्तेमाल उचित है।
अदालत ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि वह कलात्मक स्वतंत्रता के व्यापक सवाल पर खुद फैसला देने की स्थिति में नहीं है और ऐसे मुद्दों पर संबंधित सरकारी अथॉरिटी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ता ने फिल्म के क्लाइमैक्स से ‘शूरवीर’ को हटाने या उसकी जगह कोई दूसरा background track इस्तेमाल करने की मांग की है।
याचिका में सिर्फ इस एक फिल्म की बात नहीं की गई है। इसमें यह भी मांग की गई है कि भविष्य में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण व्यक्तियों से जुड़े गीतों, रचनाओं या प्रतीकों को फिल्मों में इस्तेमाल करने को लेकर स्पष्ट guidelines बनाई जाएं।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व से जुड़ी रचना को ऐसे संदर्भ में नहीं इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जिससे उस व्यक्तित्व की छवि या विरासत का अर्थ बदलता हुआ नजर आए।
‘शूरवीर’ की शुरुआत भी है खास
इस विवाद को और दिलचस्प बनाता है गाने का मूल संदर्भ।
‘शूरवीर’ को महाराणा प्रताप की वीरता और उनके संघर्ष को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। इसके बोल मेवाड़, चेतक, सम्मान और बलिदान जैसे विषयों पर केंद्रित हैं।
यही वजह है कि गाने को गैंगस्टर हिंसा वाले sequence में सुनाई देना कुछ लोगों को असंगत लगा।
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में यह भी कहा गया कि मूल गीत का उद्देश्य अपराध या गैंगस्टर संस्कृति को दिखाना नहीं था, बल्कि एक ऐतिहासिक योद्धा को सम्मान देना था।
विवाद सिर्फ इतिहास और भावनाओं तक सीमित नहीं
इस मामले का एक दूसरा पहलू copyright और permission से भी जुड़ा है।
‘शूरवीर’ से जुड़े कलाकार Rapperiya Baalam ने पहले आरोप लगाया था कि फिल्म में उनके गीत का इस्तेमाल उनकी अनुमति और उचित credit के बिना किया गया।
बाद में इस मामले को लेकर कानूनी नोटिस की बात भी सामने आई।
हालांकि, गीत के अधिकार और फिल्म में उसके इस्तेमाल को लेकर पक्षों की अलग-अलग बातें सामने आई हैं। इसलिए इस हिस्से को अंतिम रूप से तय विवाद मानने के बजाय इसे संबंधित पक्षों के दावों के रूप में देखना जरूरी है।
CBFC ने भी लिया मामले का संज्ञान
विवाद बढ़ने के बाद Central Board of Film Certification यानी CBFC के सामने भी मामला पहुंचा।
इसके बाद सामने आया कि Excel Entertainment ने CBFC को बताया कि वह संबंधित sequence से ‘Shoorveer’ को voluntarily replace करेगा, जब तक इस बदलाव से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होती हैं।
इससे यह साफ है कि विवाद अब केवल सोशल मीडिया या राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फिल्म के content में बदलाव की प्रक्रिया तक पहुंच चुका है।
राजस्थान में भी उठी थी आपत्ति
फिल्म में गाने के इस्तेमाल को लेकर राजस्थान से भी विरोध की आवाजें उठी थीं।
राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने CBFC को पत्र लिखकर गाने के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। उनका तर्क था कि महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास में एक बेहद सम्मानित व्यक्तित्व हैं और उनसे जुड़े गीत को काल्पनिक गैंगस्टर किरदारों के साथ जोड़ना उचित नहीं है।
इस विरोध के बाद मामला और बड़ा हो गया और आखिरकार दिल्ली हाईकोर्ट में PIL के रूप में पहुंचा।
Creative Freedom बनाम Historical Sensitivity
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल सिर्फ ‘शूरवीर’ गाने तक सीमित नहीं है।
यह मामला उस पुरानी बहस को भी सामने लाता है कि फिल्मकारों की creative freedom की सीमा कहां तक होनी चाहिए और ऐतिहासिक या सांस्कृतिक प्रतीकों के इस्तेमाल में sensitivity कितनी जरूरी है।
एक तरफ फिल्मकारों का तर्क हो सकता है कि किसी गीत को नए cinematic context में इस्तेमाल करना creative expression का हिस्सा है।
दूसरी तरफ याचिकाकर्ता का कहना है कि जब कोई गीत किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व की वीरता और विरासत से गहराई से जुड़ा हो, तो उसे बिल्कुल विपरीत संदर्भ में इस्तेमाल करने से उसके मूल अर्थ पर असर पड़ सकता है।
‘Mirzapur’ की दुनिया और ‘Shoorveer’ का contrast
Mirzapur franchise की पहचान अपराध, सत्ता संघर्ष, बदला, हिंसा और गैंगवार की कहानी के तौर पर रही है।
फिल्म में भी इसी दुनिया को बड़े पर्दे पर आगे बढ़ाया गया है। ऐसे में एक तरफ महाराणा प्रताप जैसे ऐतिहासिक योद्धा की वीरता और सम्मान को दर्शाने वाला गीत है और दूसरी तरफ fictional gangsters की हिंसक दुनिया।
यही contrast इस विवाद का केंद्र है।
क्या फिल्म से हटेगा ‘शूरवीर’?
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण development यह है कि Excel Entertainment ने संबंधित sequence से गाने को replace करने की बात कही है।
हालांकि, इसे पूरी तरह final बदलाव मानने से पहले संबंधित औपचारिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
वहीं दिल्ली हाईकोर्ट में भी मामले की सुनवाई जारी है। अदालत ने फिल्म की तरफ से पेश वकील को फिल्म देखने और इस मुद्दे पर अपना जवाब देने को कहा है।
क्या है पूरा मामला?
संक्षेप में देखें तो विवाद के चार मुख्य पहलू हैं:
पहला: ‘शूरवीर’ मूल रूप से महाराणा प्रताप को समर्पित गीत है।
दूसरा: इसे Mirzapur: The Movie में गैंगस्टर और हिंसा वाले sequence में इस्तेमाल किया गया।
तीसरा: इस इस्तेमाल को लेकर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ी आपत्ति उठी और मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा।
चौथा: विवाद बढ़ने के बाद Excel Entertainment ने संबंधित sequence से गाने को voluntarily replace करने की जानकारी CBFC को दी।
अब आगे क्या होगा?
अब नजर दिल्ली हाईकोर्ट की अगली कार्यवाही और फिल्म के संबंधित sequence में होने वाले बदलाव पर है।
यह मामला आगे चलकर फिल्मों में historical figures, cultural symbols और पहले से मौजूद लोकप्रिय रचनाओं के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ी बहस का आधार भी बन सकता है।
फिलहाल ‘शूरवीर’ विवाद ने Mirzapur: The Movie की कहानी को फिल्म की बॉक्स ऑफिस सफलता से निकालकर creative freedom, cultural sensitivity और artistic responsibility की बहस के केंद्र में ला दिया है।
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Rajni
Official editorial writer covering cinema box office, OTT streaming releases, Bollywood & Hollywood news, and pop culture for OnscreenBuzz.com.
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