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Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: Supreme Court ने लगाई फटकार, ₹2 करोड़ जमा करने का आखिरी मौका; Passport भी करना होगा Surrender

Supreme Court ने Rajpal Yadav को cheque-bounce मामले में ₹2 करोड़ जमा करने का आखिरी मौका दिया है। जानिए ‘Ata Pata Laapata’ से शुरू हुई इस 15 साल पुरानी कानूनी लड़ाई की पूरी कहानी।

✍️ By Rajni
• 📅 Sep 15, 2026 • ⏱️ 1 min read
Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: Supreme Court ने लगाई फटकार, ₹2 करोड़ जमा करने का आखिरी मौका; Passport भी करना होगा Surrender
Media Desk / OnscreenBuzz.com



Rajpal Yadav News: बॉलीवुड अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव एक बार फिर अपने लंबे समय से चल रहे cheque-bounce मामले को लेकर सुर्खियों में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस मामले में ₹2 करोड़ जमा करने का आखिरी मौका दिया है। अदालत ने दो हफ्ते के भीतर रकम जमा करने के साथ-साथ राजपाल यादव को अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का भी निर्देश दिया है।

यह मामला करीब डेढ़ दशक पुराना है और इसकी शुरुआत राजपाल यादव की फिल्म ‘Ata Pata Laapata’ से हुई थी। फिल्म बनाने के लिए हुई financial dealing बाद में cheque-bounce cases में बदल गई और मामला अलग-अलग अदालतों से होता हुआ अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

इस पूरी कहानी में फिल्म, करोड़ों रुपये की financing, bounced cheques, settlement की कोशिश, जेल और अदालत में किए गए payment commitments—सब कुछ शामिल है।

Supreme Court ने राजपाल यादव को क्या आदेश दिया?

15 सितंबर 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को ₹2 करोड़ का demand draft दो हफ्ते के भीतर कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया।

इसके साथ ही उन्हें अपना passport surrender करने को कहा गया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राजपाल यादव के पिछले conduct को लेकर भी नाराजगी जताई। अदालत की टिप्पणी का लहजा काफी सख्त था और राजपाल यादव से कहा गया कि वह अदालत के सामने किए गए commitments को गंभीरता से लें।

यानी फिलहाल उन्हें राहत जरूर मिली है, लेकिन यह राहत अदालत की शर्तों के साथ है।

पहले ₹5 करोड़ जमा करने की शर्त क्यों आई थी?

इस मामले में कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को एक और अंतरिम राहत दी थी।

8 सितंबर को अदालत ने उन्हें surrender से अंतरिम राहत देते हुए ₹5 करोड़ जमा करने की शर्त रखी थी।

इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को हुई। इस सुनवाई में अदालत ने payment को लेकर नया direction देते हुए ₹2 करोड़ का demand draft दो हफ्ते में जमा करने और passport surrender करने को कहा।

इसलिए ₹5 करोड़ और ₹2 करोड़ को एक ही आदेश की रकम समझना सही नहीं होगा। दोनों अलग-अलग चरणों में अदालत के निर्देशों से जुड़ी रकम हैं।

आखिर ‘Ata Pata Laapata’ से कैसे जुड़ा पूरा मामला?

इस कानूनी कहानी की शुरुआत साल 2010 के आसपास हुई।

राजपाल यादव उस समय फिल्म ‘Ata Pata Laapata’ बनाने की तैयारी कर रहे थे। यह उनके लिए खास project था क्योंकि वह फिल्म में अभिनय के साथ-साथ निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।

फिल्म के निर्माण के लिए करीब ₹5 करोड़ की financial dealing हुई।

लेकिन फिल्म के निर्माण और release में समय लगा और बाद में financial arrangement को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

फिल्म 2012 में रिलीज हुई, लेकिन box office पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसके बाद repayment को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद और गहरा गया।

फिर आए आठ Cheques

Financial arrangement के बाद रकम लौटाने को लेकर agreements हुए।

अदालती मामले के अनुसार, repayment के लिए आठ post-dated cheques जारी किए गए थे।

इनमें से सात cheques के dishonour होने के बाद सामने वाली पार्टी ने अलग-अलग legal complaints दर्ज कराईं।

यहीं से मामला सिर्फ financial dispute नहीं रहा, बल्कि cheque-bounce cases में बदल गया।

भारत में किसी cheque के dishonour होने पर तय कानूनी परिस्थितियों में Negotiable Instruments Act की Section 138 के तहत criminal proceedings शुरू की जा सकती हैं।

राजपाल यादव के खिलाफ भी इसी प्रावधान के तहत कार्रवाई हुई।

2018 में राजपाल यादव को दोषी ठहराया गया

कई साल तक मामला अदालत में चलता रहा।

साल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी Radha Rajpal Yadav को दोषी ठहराया।

राजपाल यादव को उस समय छह महीने की imprisonment की सजा सुनाई गई।

इसके बाद इस फैसले को चुनौती दी गई और मामला आगे की अदालतों तक पहुंचा।

बाद में sentence को घटाकर तीन महीने की simple imprisonment किया गया और अलग-अलग मामलों की सजा को concurrent रखने का फैसला हुआ।

इसका मतलब था कि सातों मामलों की सजा अलग-अलग क्रम में नहीं, बल्कि एक साथ चलनी थी।

Settlement की कोशिशों से भी नहीं सुलझा विवाद

मामला आगे बढ़ने के साथ दोनों पक्षों के बीच settlement की कोशिशें भी हुईं।

राजपाल यादव की तरफ से अलग-अलग मौकों पर रकम चुकाने और settlement करने के commitments किए गए।

लेकिन अदालत में तय की गई समय-सीमा के भीतर payments को लेकर लगातार दिक्कतें आती रहीं।

यही वजह रही कि अदालत ने उनके conduct और compliance को गंभीरता से देखना शुरू किया।

समय के साथ interest, compensation और दूसरी legal liabilities जुड़ने के कारण विवाद की कुल रकम भी काफी बढ़ गई।

Liability करोड़ों में पहुंची

अदालती proceedings में कुल liability करीब ₹9 करोड़ के आसपास बताई गई।

हालांकि इस रकम को सिर्फ मूल ₹5 करोड़ की सीधी बढ़ोतरी समझना सही नहीं होगा। इसमें अलग-अलग चरणों में तय compensation, interest, penalties और पहले जमा की गई रकम के adjustment जैसे पहलू शामिल रहे हैं।

बाद के court orders में सातों मामलों के लिए अलग-अलग रकम जमा करने के निर्देश भी दिए गए।

फरवरी 2026 में जाना पड़ा Tihar

इस मामले ने फरवरी 2026 में बड़ा मोड़ लिया।

अदालत के आदेश के बाद राजपाल यादव ने Tihar Jail में surrender किया।

उनकी गिरफ्तारी और जेल जाने की खबर ने बॉलीवुड में भी काफी चर्चा पैदा की।

हालांकि इसके बाद भी कानूनी लड़ाई खत्म नहीं हुई। रकम जमा करने और अदालत की शर्तों का पालन करने की प्रक्रिया चलती रही और बाद में उन्हें कुछ राहत मिली।

जुलाई में High Court से भी नहीं मिली पूरी राहत

जुलाई 2026 में Delhi High Court ने मामले में राजपाल यादव की conviction को बरकरार रखा।

सातों cheque-bounce cases में तीन महीने की imprisonment की सजा कायम रही।

अदालत ने उनके लंबे litigation history और payment commitments को देखते हुए उन्हें पूरी राहत देने से इनकार कर दिया।

इसके बाद राजपाल यादव ने Supreme Court का दरवाजा खटखटाया।

राजपाल यादव की तरफ से क्या दलील दी गई?

Supreme Court में राजपाल यादव की तरफ से मामले को लेकर एक अहम legal argument रखा गया है।

उनकी तरफ से कहा गया कि दोनों पक्षों के बीच बाद में एक settlement agreement हुआ था, जिसके तहत financial liability को नए सिरे से settle करने की कोशिश की गई थी।

उनकी legal team का तर्क है कि बाद में हुए settlement का असर पुराने cheque-bounce cases पर भी पड़ता है।

इसी आधार पर उन्होंने Supreme Court के सामने अपनी conviction और आगे की कार्रवाई को चुनौती दी है।

दूसरी तरफ शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि cheque dishonour से जुड़ी liability और अदालत के आदेशों का पालन न किए जाने का मुद्दा अभी भी कायम है।

यही कानूनी सवाल अब Supreme Court के सामने महत्वपूर्ण हैं।

अब राजपाल यादव के सामने क्या है?

फिलहाल राजपाल यादव को Supreme Court से राहत मिली है, लेकिन उन्हें अदालत की शर्तों का पालन करना होगा।

उन्हें दो हफ्ते के भीतर ₹2 करोड़ जमा करने होंगे और passport surrender करना होगा।

अगर वह अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके लिए मुश्किलें दोबारा बढ़ सकती हैं।

वहीं, मामले की मूल कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। Supreme Court को आगे settlement और पुराने cheque-bounce proceedings के बीच के कानूनी संबंध सहित दूसरे मुद्दों पर फैसला करना है।

एक फिल्म से शुरू हुई कहानी, जो 15 साल बाद भी जारी है

राजपाल यादव की कहानी को सिर्फ एक cheque-bounce case के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।

एक अभिनेता ने निर्देशक बनने का सपना देखा।

उस सपने के लिए करोड़ों रुपये की financial dealing हुई।

फिल्म बनी और box office पर उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई।

फिर repayment को लेकर विवाद हुआ।

Cheques bounce हुए।

मामला अदालतों में पहुंचा।

सालों तक settlement की कोशिशें होती रहीं।

राजपाल यादव को जेल तक जाना पड़ा और अब Supreme Court ने उन्हें एक और मौका दिया है।

‘Ata Pata Laapata’ भले ही बॉक्स ऑफिस पर अपनी पहचान नहीं बना पाई, लेकिन इस फिल्म से जुड़ा financial dispute राजपाल यादव की जिंदगी का ऐसा chapter बन गया है, जो करीब डेढ़ दशक बाद भी खत्म नहीं हुआ है।

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Rajni

Official editorial writer covering cinema box office, OTT streaming releases, Bollywood & Hollywood news, and pop culture for OnscreenBuzz.com.

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